पुरातन समय में कुछ ऐसे स्थान होते थे जहां प्रवेश करने से पूर्व जूते-चप्पल बाहर उतार दिए जाते थे लेकिन जैसे-जैसे लोगों पर पाश्चत्य संस्कृति का दबदबा बन रहा है वैसे-वैसे वह अपने ऋषि-मुनियों और विद्वानों द्वारा दिए गए संस्कारों और मान्यताओं को भूलते जा रहे हैं। जिससे की अनचाही मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। 

 ध्यान रखें इन स्थानों पर जाते समय जूते-चप्पल नहीं पहननें चाहिए-

*  तिजोरी अथवा अपने धन रखने के स्थान पर जूते उतार कर जाना चाहिए क्योंकि धन को देवी लक्ष्मी के समान माना जाता है और उनके पास जूते पहनकर जाने का अर्थ है उनका अनादर करना। जहां लक्ष्मी का अनादर होगा वो उस स्थान को त्याग देती हैं।

* पवित्र नदी को देवी स्वरूप माना गया है। उसमें जूते-चप्पल अथवा चमड़े से बनी चीजें पहनकर जाने से पाप लगता है।

* रसोई में नंगे पैर ही प्रवेश करें। स्मरण रहे रसोई व्यवस्थित, शुद्ध और साफ-सुथरी होनी चाहिए। ऐसी रसोई में देवी-देवता अपना स्थाई वास बना लेते हैं जिससे घर में कभी भी धन और सुख-समृद्धि की कमी नहीं रहती।

*  भंडार घर में देवी अन्नपूर्णा का वास माना जाता है। उसका रख-रखाव भी रसोई की भांति ही करना चाहिए अन्यथा घर में कभी अन्न की बरकत नहीं होती।

*  श्मशान में जब किसी को अंतिम विदाई देनी हो तो वहां भी जूते पहन कर नहीं जाना चाहिए।

* अस्पताल में किसी संबधी का हाल पूछने जाएं तो उसके कमरे में भी जूते-चप्पल पहनकर नहीं जाना चाहिए।

* घर में देवी-देवताओं का स्थान होता है। वहां दैवीय शक्तियां निवास करती हैं। ऐसे में

जूते-चप्पल पहनकर घर में घुमते हैं तो उनका अपमान होता है।

अपनी प्रतिक्रिया दें

महत्वपूर्ण सूचना

भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत किसी भी विषय/ व्यक्ति विशेष, समुदाय, धर्म तथा देश के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की टिप्पणी पर कानूनी कार्रवाई (सजा या अर्थदंड अथवा दोनों) का प्रावधान है। अत: इस फोरम में भेजे गए किसी भी टिप्पणी की जिम्मेदारी पूर्णत: लेखक की होगी।

और भी पढ़ें..

विज्ञापन

hindi e news

फोटो-फीचर

हिंदी ई-न्यूज़ से जुड़े

विज्ञापन

khari kasuti