ज्योतिषशास्त्र के खगोल खंड अनुसार शनि सौरमंडल का दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है। सूर्य पुत्र शनि को अपने ही पिता सूर्य का शत्रु भी माना जाता है। इन्हें नवग्रहों में दास की उपाधि प्राप्त है। इन का रंग सांवला है एवं लंगड़ा होने के कारण इसकी गति मंद है। शनि का वाहन कौआ है। शनि को मारक, अशुभ व दुख का कारक माना जाता है। शास्त्र उत्तर कालामृत अनुसार शनि स्वास्थ्य, बाधाएं, रोग, मृत्यु, नंपुसकता, वृद्धावस्था, क्रोध, विकलांगता व संघर्ष का कारक ग्रह माना गया है। 

 

शनि रविवार दिनांक 02.11.14 को रात 10 बजकर 02 मिनट से वृश्चिक राशि में गोचर कर रहे हैं। तुला जातकों के लिए साढ़ेसाती का अंतिम जबकि वृश्चिक जातकों के लिए दूसरा चरण चल रहा है। धनु के लिए साढ़ेसाती का प्रारंभ समय है। सिंह व मेष जातकों के लिए शनि की छोटी पनौती है। शनि शुक्रवार दिनांक 25.03.16 को वक्र होकर पुनः शनिवार दिनांक 13.08.16 को सक्रिय होंगे। आइए जानते हैं शनि के वक्र होने से द्वादश राशियों पर क्या प्रभाव रहेंगे।

 

शनिदेव के वक्री होने से हर राशि में शनि की चाल का कुछ ऐसा रहेगा प्रभाव

मेष: शनि के आठवें भाव में वक्र होने से ढैय्या का प्रभाव रहेगा। काम धंधे को लेकर तनाव लाएगा परंतु सरकारी संस्थाओं से लाभ भी मिलेगा। देश-विदेश की यात्रा संभव है। छल के योग हैं अतः लेन-देन में सावधानी बरतें।

 

वृष: शनि के सातवें भाव में वक्र होने से आय वृद्धि के साथ ख़र्चे बढ़ेंगे। सामाजिक जीवन में परेशानी आएगी। महत्वपूर्ण कार्यों में अवरोध होगा। प्रियजन का वियोग सताएगा। कानूनी विवाद के योग हैं। घर बदलने के योग हैं।

 

मिथुन: शनि के छ्ठे भाव में वक्र होने से आजीविका में लाभ होगा। तकनीकी कार्य से जुड़े लोगों को उन्नति मिलेगी। पारिवारिक संबन्धों में कटुता रहेगी। आर्थिक मसले तंग करेंगे। स्थान परिवर्तन के योग हैं। प्रोपेर्टी लाभ देगी।

 

कर्क: शनि के पांचवे भाव में वक्र होने से अपकीर्ति फैलेगी। विपरीत लिंग से अधिक प्रगाढ़ता नुकसान देगी। पूंजी के संयोजन में धोखाधड़ी की संभावना बन रही है। संतान पक्ष की चिन्ता बढ़ेगी। ख़र्च बढ़-चढ़कर रह सकते हैं।

 

सिंह: शनि के चौथे भाव में वक्र होने से प्रोफेशन में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ेगा। समय प्रॉपर्टी की ख़रीद-फरोख़्त के लिए बढ़िया है। प्रोफेशन हेतु वर्तमान जगह को बदलना पड़ेगा। घर के बुज़ुर्गों का स्वास्थ्य बिगड़ेगा।

 

कन्या: शनि के तीसरे भाव में वक्र होने से अप्रतियाशित भय व हानि रहेगी। संतान पक्ष को लेकर कुछ सुकून का अनुभव करेंगे। पारिवारिक मांगलिक आयोजनों के योग हैं। प्रोफेशन में उन्नति होगी। धनार्जन व निवेश होगा।

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