जयपुर !  कांग्रेस की राजस्थान इकाई के अध्यक्ष सचिन पायलट का कहना है कि राज्य की भाजपा सरकार अपने वित्तीय कुप्रबंधन की वजह से कर्ज संकट का सामना कर रही है। सरकार की नीतियों की वजह से कृषि क्षेत्र पर दबाव काफी बढ़ गया है।
पायलट (37) ने आईएएनएस को दिए साक्षात्कार में कहा, "आपने (वसुंधरा राजे सरकार) दो साल पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की आलोचना में खर्च कर दिए। लेकिन, इस बार यहां वित्तीय कुप्रबंधन है। कृषि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए किसी भी तरह की कोई योजना नहीं है।"
पायलट ने कहा, "आप (वसुंधरा राजे सरकार) पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की सामाजिक कल्याण की योजनाए बंद कर रहे हैं। हर चीज का निजीकरण कर रहे हैं और 'रिसर्जेट राजस्थान' का मुखौटा ओढ़ कर राज्य में कई लाख करोड़ रुपये निवेश लाने का दावा कर रहे हैं।"
कांग्रेस नेता ने कहा, "आज सरकार वित्तीय तबाही के कगार पर खड़ी है। सरकारी कर्मचारियों को वेतन देने के लिए ओवरड्राफ्ट सीमा को बढ़ा रही है। विडंबना यह है कि भाजपा का कहना है कि उसने राज्य को बीमारू राज्यों की श्रेणी से बाहर निकाल लिया है। अगर ऐसा है तो सरकार का खजाना खाली क्यों है?"
पायलट ने यह भी कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार राजस्थान के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। राज्य सरकार को किसानों को राहत देने के लिए पैसा नहीं मिल रहा है, जबकि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात को दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच मतभेदों का खामियाजा राजस्थान भुगत रहा है।
उन्होंने कहा कि वसुंधरा सरकार के प्रदर्शन की वजह से राज्य में भाजपा का ग्राफ नीचे जा रहा है। स्थानीय निकाय चुनाव से साबित हुआ है कि राज्य में भाजपा का मत प्रतिशत गिरा है।
पायलट ने कहा कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने बीते दो साल में राज्य की 1.30 लाख किलोमीटर की यात्रा की है।
पायलट ने कहा, "कहते हैं कि शांतिकाल में पसीना बहाने वालों को युद्ध में खून नहीं बहाना पड़ता। मुझे नहीं लगता कि पार्टी की मशीनरी को चालू करने के लिए हमें चुनाव का इंतजार करना चाहिए। आपको यात्रा करनी ही होगी। आपको लोगों से जुड़ना, उनसे बात करना ही होगा। चुनाव न होने के समय मैं लोगों से मिलने के लिए छोटी सभाओं को पसंद करता हूं। चुनाव अभियान इससे अलग होते हैं।"
कांग्रेस की राजस्थान इकाई के अध्यक्ष ने कहा, "जब मैंने काम (बतौर अध्यक्ष) शुरू किया, उस वक्त हम कांग्रेस की विधानसभा चुनाव में अब तक की सबसे बड़ी हार से उबरने की कोशिश कर रहे थे। इससे उबरने के लिए कड़ी मेहनत की जरूरत थी।"
उन्होंने इस बात को खारिज किया कि पार्टी में कोई गुटबंदी है। उन्होंने कहा कि वह 'सौभाग्यशाली और भाग्यवान' हैं कि उन्हें पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं का समर्थन और निर्देशन मिल रहा है।
उन्होंने कहा, "लोग पार्टी के बारे में आकलन उसके प्रदर्शन से करते हैं, फिर पार्टी चाहे सत्ता में हो या विपक्ष में। बतौर विपक्ष हमारा प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा है। हम बीते दो सालों में लोगों के दिल-दिमाग जीतने में सफल रहे हैं।"

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