पाकिस्तान के नेताओं ने इसकी स्थापना के समय से ही भारत के विरुद्ध ‘छद्मयुद्ध’ छेड़ रखा है तथा पाक अधिकृत कश्मीर व अन्य स्थानों पर चलाए जा रहे प्रशिक्षण शिविरों में आतंकवादियों को प्रशिक्षण देने के बाद उनकी भारत में लगातार घुसपैठ करवा रहे हैं। इसके साथ ही वे भारत में जाली करंसी, नशीले पदार्थों तथा हथियारों की तस्करी करवा कर भारत की अर्थव्यवस्था और युवा पीढ़ी को तबाह करने तथा प्रतिरक्षा को छिन्न-भिन्न करने की कोशिशें लगातार जारी रखे हुए हैं। 
पाकिस्तान के उकसावे पर ही समय-समय पर पाक समर्थक अलगाववादी तत्वों द्वारा जम्मू-कश्मीर में हड़तालें, बंद और भारत विरोधी नारे लगाने तथा पाकिस्तान के झंडे लहराने की घटनाएं आम होती रहती हैं और 2008 से यह सिलसिला लगातार चला आ रहा है। इन घटनाओं के साथ-साथ भारत आने वाले पाकिस्तानी नेताओं और भारत स्थित पाकिस्तानी राजदूतों से जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेताओं की  मुलाकातें भी भारत-विरोधी रवैये का ही एक रूप हैं। कश्मीर घाटी में राजनीतिक रैलियों के साथ-साथ क्रिकेट मैचों तक के दौरान पाकिस्तान के झंडे लहराए जाते हैं और भारत विरोधी नारे लगाए जाते हैं जो अलगाववादी तत्वों से निपटने में प्रशासन की कमजोरी का प्रमाण है। अभी तक तो यह घटनाक्रम जम्मू-कश्मीर तक ही सीमित था परंतु अब तो यह रुझान देश की राजधानी दिल्ली तक आ पहुंचा है। इसका प्रमाण 9 फरवरी को मिला जब पहली बार नई दिल्ली स्थित ‘जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय’ (जे.एन.यू.) और फिर 11 फरवरी को ‘प्रैस क्लब आफ इंडिया’ में भारत विरोधी नारे लगाए गए। ‘जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय’ में 9 फरवरी को उस समय भारी हंगामा हो गया जब चरमपंथी छात्रों के एक समूह ने संसद हमले के दोषी अफजल गुरु की बरसी और ‘जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट’ (जे.के.एल.एफ.) के सह-संस्थापक मकबूल भट्टï की याद में एक कार्यक्रम का आयोजन किया।मकबूल भट्टï को 11 फरवरी, 1984 को तथा 2001 में भारतीय संसद पर हमले के मुख्यारोपी अफजल गुरु को 9 फरवरी, 2013 को तिहाड़ जेल में फांसी दी गई थी। इस समारोह में अफजल गुरु को शहीद का दर्जा देने के अलावा भारत विरोधी नारे लगाए गए।इसका अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ए.बी.वी.पी.) के छात्रों ने भारी विरोध किया। ए.बी.वी.पी. की शिकायत के बाद जे.एन.यू. प्रशासन ने चरमपंथी छात्रों से समारोह करने की इजाजत वापस ले ली परंतु हालात इतने बिगड़ गए कि प्रशासन को पुलिस बुलानी पड़ी तथा कार्यक्रम के आयोजन से नाराज ए.बी.वी.पी. ने जे.एन.यू. कैम्पस में बंद का आह्वïान कर दिया।इसके बाद नई दिल्ली के वसंत कुंज उत्तरी थाने में देशद्रोह की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत ‘अज्ञात’ लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया। मुकद्दमा दर्ज होते ही जे.एन.यू. में चरमपंथी छात्र नेता भूमिगत हो गए तथा 12 फरवरी को जे.एन.यू. छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को देशद्रोह और आपराधिक षड्यंत्र के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया।यहीं पर बस नहीं, 11 फरवरी शाम को इसके निकट ही रायसीना रोड पर स्थित व संसद भवन से सटे ‘प्रैस क्लब आफ इंडिया’ में भी भारत विरोधी गतिविधियां हुईं और यहां दिल्ली विश्वविद्यालय (डी.यू.) के प्रोफैसरों की पार्टी में, जिसके लिए स्थान की बुकिंग संसद पर हमले में आरोपी बनाए  जा चुके प्रो. एस.ए.आर. गिलानी ने करवाई थी और वह भी इसमें मौजूद था,  ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए गए। इसका वहां उपस्थित पत्रकारों तथा प्रैस क्लब के अन्य सदस्यों ने भारी विरोध किया। इसके बाद पार्टी की बुकिंग रद्द कर दी गई और ‘प्रैस क्लब’ के जनरल सैक्रेटरी नदीम अहमद काजमी ने कहा कि उन्हें इस बात का जरा भी अनुमान नहीं था कि पार्टी भारत विरोधी रूप धारण कर लेगी।यह बात समझ से बाहर है कि भारत सरकार आखिर किस मजबूरी में जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेताओं को भारत आने वाले पाकिस्तानी नेताओं और पाकिस्तानी राजनयिकों से मिलने की इजाजत देती है। 

    अब राजधानी दिल्ली में ऐसी घटनाओं का होना स्पष्टï संकेत है कि देश में चरमपंथियों का जाल किस कदर फैल रहा है। इनकी गहराई में जाकर जांच करनी चाहिए कि यह स्थिति क्यों उत्पन्न हो रही है और इससे पहले कि यह कुप्रवृत्ति अधिक जोर पकड़े इसे मजबूती से दबा देने की आवश्यकता है। 

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